सबके प्रति दया, प्रेम हो = कालिका प्रसाद 

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सब   प्राणियों   के  प्रति,
जब    मन  में  पीड़ा  हो,
प्राणी   मात्र    की  पीड़ा, 
जब अपनी पीड़ा लगेगी,
तब   ये  समझ   लेना
कि हमारे हृदय में दया है।

तब   प्राणों   में  सोया 
प्रेम   जाग    जायेगा,
और   दूसरे   के  दर्द,
अपनी  पीड़ा  समझने लगेंगे,
तब  ये   समझ   लेना   कि 
ये जीवन हमें सही मिला है।

मनुष्य  की   सुमति,
गुरु  चरणों   में  समर्पण,
गुरु कृपा से  ही   होती   है,
गुरु  की  वंदना से होती है,
गुरु के प्रति निष्ठा ही,
उनकी सच्ची अर्चना है।

ईश्वर  का  सामीप्य
गुरू कृपा से ही सम्भव है,
कर्मो   का  क्षय   भी
ईश्वर की कृपा से होता है,
हृदय में दया और  प्रेम
प्रभु कृपा से जागृत होता है।
- कालिका प्रसाद सेमवाल,
रुद्रप्रयाग  उत्तराखंड
 

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