हिंदी ग़ज़ल = जसवीर सिंह हलधर 

हिंदी ग़ज़ल = जसवीर सिंह हलधर

वर्ष नूतन आ गया लो प्यार के दीपक जलायें !
घिर रहा जो हर दिशा  में रोग  कोरोना भगायें !

बादलों में रवि छुपा है साँझ होने से भी पहले ,
दीप संयम के जलाकर बांध दें तम की बलायें !

ये बला है व्योम की या चीन की ये चालबाजी ,
भूमि से नभ को दिखायें चाँद जैसी सौ कलायें !

गरल भरती दृष्टियों का तोड़ दें झूठा दिलाशा ,
वेद मंत्रों के सहारे रोग को जड़ से मिटायें ।

तोड़ दें हम धुंध कुहरे से बनी दीवार सारी ,
सींच दीपों के उजाले जोड़ देवें श्रंखलायें !

इस समस्या का सुरक्षा ही बड़ा संधान यारो ,
शक्ति का संचार करती हैं सदा वैदिक ऋचायें ।

सैनिकों की भांति लड़ते दिख रहे योद्धा चिकित्सक ,
देश के इन बांकुरों को स्वर्ण लिपियों में सजायें ।

काल का पैगाम है यह या नए युग का विगुल है ,
हिन्द "हलधर" का करेगा तय सभी दुर्गम दिशायें ।
= जसवीर सिंह हलधर, देहरादून  
 

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