हिंदी ग़ज़ल - जसवीर सिंह हलधर 

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उसने क्या बर्वाद किया है यह उसको अहसास नहीं ।
संबंधों को खाद किया है यह उसको अहसास नहीं ।

यारी को कोसा है उसने बड़ी बड़ी बातें करके ,
माँ पर भी संवाद किया है यह उसको अहसास नहीं ।

रोजाना घुलता मिलता है जैसे कोई अपना हो ,
कल उसने उन्माद किया है यह उसको अहसास नहीं ।

मान बढ़ाया मैंने उसका पुरस्कार भी दिलवाया ,
उसने छल उत्पाद किया है यह उसको अहसास नहीं ।

मौसम जैसे करवट लेता ऐसे रंग बदलता है ,
रिश्तों में अवसाद किया है यह उसको अहसास नहीं ।

साथ निभाया मैंने हरदम मौसम झंजावातों में,
हर नाता अपवाद किया है यह उसको अहसास नहीं ।

"हलधर" मान बढ़ाते उसका दूर दूर तक दुनिया में ,
उसने कब नौशाद किया है यह उसको अहसास नहीं ।
- जसवीर सिंह हलधर , देहरादून  
 

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