हो नया पहचान = अनिरुद्ध कुमार

pic

खुश रहे सारा जमाना, चाहते भगवान। 
दिल लगाके जिंदगी जी, है इसी में शान।।
देख ले रौनक जहाँ का, सोंच ना इंसान।
पेड़ पौधों से सजाया, पंछियों का गान।।
      
क्या हँसी गुलजार मौसम, नित नये श्रृंगार ,
रूप बदले मोह ले मन, हर तरफ गुलजार।।
झील झरने और नदियाँ, है खुला आकाश।
झिलमिलाये चांदनी नित, मंद मंद प्रकाश।।
   
यह धरा उनकी विरासत, छेड़ कोई तान।
खिलखिलाये होठ सारे, मुस्कुराये जान।।
प्यार से इसको सजाओ, बैठ ना नादान।
हो बहारों का बसेरा, राह हो आसान।।
    
जिंदगी नव गीत गाये, हो यही अरमान।
बंदगी मानो इसे बस, जाग जा इंसान।।
नेह की बाती जला ले, देव सबको मान।
प्यार से जीवन गुजारो, हो नया पहचान।।
= अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।

Share this story