होली है =  अनिरुद्ध

होली है = अनिरुद्ध

बनठन के श्रृंगार सजाओ होली है।

रंग गुलाबी लाल लगाओ होली है।

आजा प्यारे खेले होली हिलमिल के,

झूम रहा संसार बताओ होली है।

प्यार बड़ा अनमोल बहारों का कहना,

दुश्मन से भी प्यार जताओ होली है।

सुंदर यह संसार खुशी हो जीवनमें,

फूलों सा मुस्कान रचाओ होली है।

गोरा काला ना करना इस होलीमें,

प्रीत जरा दमदार दिखाओ होली है।

जीवन है बलिदान सदा यह याद रहे,

इक दूजे पर जान लुटाओ होली है।

बासंती उपहार रिझाये अनि का दिल,

रंगो का त्योहार मनाओ होली है।

=अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।

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