होली = निहारिका झा  

होली = निहारिका झा

फागुन  की आज बहे मस्त बयार है।
झूम रहा देखो आज सारा संसार है।

उड़ रहा रंग अबीर गुलाल है।
दिख रहा हर रूप एक रंग हाल है।

मस्ती की भंग में झूमे नर नार है।
फागुन के रंग  में रंगा बाल बाल है।

बने पकवान घर घर मे धमाल है।
फागुन की आज बह रही बयार है।।

निहारिका झा, खैरागढ राज.(छ ग)
 

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