होली = प्रदीप सहारे 

होली = प्रदीप सहारे

होली के त्यौहार पर,
सुझी थोडी मसखरी।
गोरी को आँख मारी,
गोरी हो गयी लाल ।
गोरी हुई लाल तो !
हुवा बाप उसका,
बहुत आग बबुला।
भाई ने सुना तो !
वह हुवा लाल-पीला।
आया डंडा लेकर,
कर दिया मार मार कर।
शरीर का रंग सारा हरा ।
घूम रहा अब वह,
" हँपी होली" बोलते,
नौजवान छोरा ..।
" होली भी हैं जरुरी,
बस् रखें थोडी दूरी ।"
= प्रदीप सहारे, इंदौर 

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