होली गीत = शलभ 

होली गीत = शलभ

चंग बनाओ की रंग रँगीली होली आई,
भंग पिलाओ की रंग रँगीली होली आई।
    गली गली डगर डगर में रंग बिरंगे रंग हैं,
    अंग भिगाओ की रंग रंगीली होली आई।
छज्जे ऊपर गोरी बैठी पिचकारी चलाये,
जंग मिटाओ की रंग रँगीली होली आई।
      कोई सहेली कोई भाभी और रंग पुती मूरतें,
       ढंग सिखाओ की रंग रँगीली होली आई।
"शलभ" घर पे आने वाले होलियारे रँगीले,
मन खिलाओ की रंग रँगीली होली आई।।
=  शलभ फैजाबादी, फैज़ाबाद

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