मानवीय जीवट - (लावणी छंद) = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

मानवीय जीवट - (लावणी छंद) = कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

कठिन समय है घोर निराशा, मन तम दूर भगायें हम।
मिल कर युद्ध लड़ें विपदा से, खुशियाँ वापस लायें हम।

बैरी नंगी आँख न दिखता, हो अदृश्य यह नित घूमे।
तनिक ढील जिसने भी दे दी, अंग-अंग उसका चूमे।
कर्मों में संयम रख कर ही, जीवन नित्य बितायें हम।
मिल कर युद्ध लड़े विपदा से, खुशियाँ वापस लायें हम।2

धैर्य मंत्र है सदा विजय का, इस पर तनिक विचार करें।
छिपा हुआ हो शत्रु कहीं भी,  खोजें और प्रहार करें।
सावधान हो कार्य योजना, उत्तम एक बनायें हम।
मिल कर युद्ध लड़ें विपदा से, खुशियाँ वापस लायें हम।2

लापरवाही कर के इसको, अवसर कभी न देना है।
अलग-थलग कर के ही अब तो, इससे बदला लेना है।
सारे नियमों का पालन कर, इसको दूर भगायें हम।
मिल कर युद्ध लड़ें विपदा से, खुशियाँ वापस लायें हम।3

मन को विचलित कभी न करना, अगर संक्रमित हो जायें।
करें चिकित्सा धीरज धर कर, नहीं तनिक भी घबरायें।
डरता दृढ़ निश्चय वालों से, यह जग को बतलायें हम।
मिल कर युद्ध लड़ें विपदा से, खुशियाँ वापस लायें हम।4

मौका मिलते ही जल्दी से, टीका अब लगवायें हम।
मिल कर युद्ध लड़ें विपदा से, खुशियाँ वापस लायें हम।
= कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव
 

Share this story