मैं रोडवेज हूं = लोकेश पालीवाल

मैं रोडवेज हूं = लोकेश पालीवाल

मैं रोडवेज हूँ।.जब-जब उत्तराखंड में किसी भी प्रकार की आपदा आती है, उत्तराखंड के शासन प्रशासन को मैं याद आती हूँ, नेताओं को भी और आम उत्तराखंडी को भी, बुजुर्ग यात्री मुझे अपनी बुढ़ापे की लाठी के रूप में पाते हैं, दिव्यांगों को भी उनके शरीर के अंग की तरह लगती हूँ जब उनकी यात्रा सुगम बनाती हूँ, पढ़ने वाली बालिकाएं हक से मेरी गोद में बैठकर अपने विद्यालय जाती हैं, जब थकी हारी वे विद्यालय से घर लौटती हैं, मेरी गोद में सुकून पाती हैं, हाँ में वही रोडवेज हूँ, मुझसे जुड़ी कई योजनाएं चलाकर कई राजनेता चुनावी वैतरणी पार कर जाते हैं, चुनाव में चुनाव आयोग को भी में बहुत याद आती हूँ, जब देश पर कोई संकट आता है तब मैं अपने मानस पुत्रों ड्राइवर, कंडक्टर के साथ भारत माता के वीर पुत्रों की हर संभव सहायता के लिए तत्पर रहती हूँ तो प्राकृतिक आपदाओं के समय भी मैं व मेरे मानस पुत्र अपना घर बार छोड़कर जान हथेली पर लेकर सबसे आगे आ जाते हैं, किन्तु मुझे कभी-कभी दु:ख भी होता है जब मेरा उपयोग अलग अलग रूप में करने के बाद भी आंदोलनों, सरकार विरोधी प्रदर्शनों में सबसे पहले ये सब लोग जो मुझसे जुड़ी सुविधाएं ले रहे थे, मुझे ही अपने गुस्से का शिकार बनाते हैं, शासन प्रशासन के लोग मेरे मानस पुत्रों को दोयम दर्जे का प्राणी समझ लेते हैं और उनकी जान को किसी जानवर की जान से ज्यादा महत्व नहीं देते, उनके परिजनों को महीनों तक भूखा मरने को छोड़ देते हैं, तो उनको कोरोना जैसी जानलेवा संक्रामक बीमारी से पीड़ित लोगों के बीच काम करने के बाद भी न तो उनकी जांच करवाना उचित समझते हैं न ही टीके या अन्य रोग प्रतिरोधक औषधि उपलब्ध कराने का ही प्रयास करते हैं, यहां तक कि दो बोल सम्मान के बोल कर कोरोना योद्धा बोल देने में भी अपना अपमान समझते हैं, और तब और अधिक दु:ख होता है जब मेरे मानस पुत्र अपना सर्वोच्च बलिदान दे देते हैं और उनका यह बलिदान सारा समाज मूकदर्शक की तरह देखता रहता है, उनके भाइयों को रो पीटकर अपने इन बलिदानी वीरों के लिए सम्मान भी मांग-मांग कर लेना पड़ता है, हैं में वही रोडवेज हूं, कहना तो और भी बहुत कुछ है लेकिन डरती हूँ कहीं मेरे मानस पुत्र जो अपनी कर्तव्यनिष्ठा में अपने बच्चों, परिजनों, अपने स्वास्थ्य व स्वयं अपने अस्तित्व को भी भूल गए हैं कहीं उनका ध्यान अपनी सांसारिक चिंताओं की तरफ जाकर उनको कर्तव्य पथ से विमुख न कर दे। 
= लोकेश दत्त पालीवाल, भवाली (नैनीताल)

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