जीवन में बढ़ता एकांत पन (लेख) - झरना माथुर 

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आज के समय मे देखा जाये तो हम सब के जीवन में अकेलापन बढ़ता जा रहा है। संयुक्त परिवार से एकाकी परिवार,गाँव से शहर पलायन, बच्चे एक या दो।उनका भी काम मे व्यस्तता। बाद मे अपनी जॉव और परिवार मे व्यस्त हो जाना। बहुत से कारण है।वृद्धा अवस्था मे साथी का होना या नही होना। अगर है भी तो विचारो का मिलना। अब तो एक कारण और भी बढ़ गया है महामारी का।
जब भी जीवन मे एकांतपन  का सामना हो तो खुद से विचार करो। कभी कुछ जीवन की इच्छाएं जो अधूरी रह गयी किसी कारण नही हो पायी। कुछ जानकारी किसी के बारे मे लेना चाहते हो कुछ सीखना चाहते हो।मत डरो कोई कुछ नही कहेगा। किसी भी काम को सीखने की कोई उमर नही होती। उसे कीजिये।
दिन मे किसी से बात जरुर कीजिये या किसी किताब को जरुर पढ़िए । जिस मे रुचि हो वो काम जरुर कीजिये ।कुछ न कुछ सीखने की कोशिश कीजिये। दिन मे एक बार खुल के हंसिये , हो सके तो ताली भी जोर से बजाये।
आप लोग हंस रहे है। मत हंसिये । ये सब आपके स्वास्थ्य के लिये बहुत जरूरी है।
आईना भी देखिये खुद को संवारिये । महसूस कीजिये आप बहुत ही सुन्दर है और तैयार  हो। अच्छे कपड़े पहनिए ।अच्छा खाए जो स्वास्थ्य के लिये जरूरी हो। कोशिश कीजिये कि  व्यस्त रहिये। यकीन मानिये जिन्दगी खूबसूरत लगने लगेगी। जीने की इच्छा बढ़ जायेगी। एक बार विचार जरुर कीजिये । एकंत जीवन का डट कर मुकाबला कीजिये ।खुश रहिये औरो को भी खुश रखिये।
- झरना माथुर, देहरादून , उत्तराखंड

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