ईश्वर वन्दना = ज्योत्सना रतुड़ी 

ईश्वर वन्दना = ज्योत्सना रतुड़ी

हे अखिल विश्व के परम पिता परमात्मा,
सभी प्राणियों में है तेरी ही आत्मा ।
तू ही है निर्विकारी शाश्वत सनातन,
ह्रदय से करुँ मैं हे ईश तेरा ही वन्दन।

क्षणभंगुर है जो ये काया ये माया,
अर्पण कर दूँ सारे ब्रहमांड में तू ही समाया।
मन में बसे जो मेरे विषय और विकार,
हर ले तू मेरे सारे काम क्रोध अहंकार ।

करुँ मैं समर्पण ये जीवन चरणों में तेरे,
हर ले तू मेरे जन्म मरण और चौरासी के फेरे।
करुँ काज जगत के पर सुमिरन तेरा हो,
सब कुछ है तेरा यही भाव मेरा हो।

बना दे प्रभु तू मेरी ऐसी दृष्टि,
समाया है सब में तेरी है सृष्टि ।
दर्शन करुँ अब सब में मैं तेरा,
दोषदृष्टि रहित कर दे मन अब तू मेरा।

रहे न तनिक भी बस मुझमे देहभिमान,
करुँ मैं समस्त प्राणियों का ह्रदय से सम्मान।
समता का तुम दे दो मुझकोअमोघ वरदान,
मन वाणी से रहूँ समदर्शी जीवन हो महान।

सुन लो मेरी विनती हे मेरे कृपानिधान,
करुँ नित तेरा ही वन्दन मैं अबोध नादान।
ले लो मुझेअपनी शरण में भक्तवत्सल भगवान,
पार करो इस भवसागर से कोटी कोटी प्रणाम।
= ज्योत्सना रतुड़ी *ज्योति* उत्तरकाशी उत्तराखण्ड
 

Share this story