जीवन - जया भराड़े बड़ोदकर 

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कड़वे घुट के सिवा
कुछ भी नही,
दिन रात की चक्की मे
पिसवाने के अलावा
कुछ भी नही,
दूर के ढोल बड़े सुहाने
दिखते हैं,
अंदर से दु:ख और दर्द
के सिवा कुछ भी नही,
मस्त होता है ये तभी
जब झूठे ख्वाब मे
ख़ुशी दिखाता है,
धरातल मे ये खुद ही
खुद से ही आँख चुराता है,
लगता था समुंदर सा
उपवन सा महकता हुआ,
दोस्तों संग जीता जागता सा
मगर धोखा ही निकला है,
खूनी संघर्ष खेल रचता है,
जीना सिखा दिया है इसने
सब तरह के लोगों मे,
सत्य यही है जीवन का,
देखते हुए चलते रहो
शिकायत न करना कभी,
तर जाओगे तुम तभी,
हर हाल मे मुस्कुराओ
सबक सिखाता है ये सभी को,
समदर से रहो सदा
सुख और दु:ख मे,
ईश्वर को तुम
इसी जीवन मे पा जाओ,
- जया भराडे बडोदकर
कामोथे, नवी मुंबई (महाराष्ट्र)

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