जी चाहता है = मनोज रोहिला

जी चाहता है = मनोज रोहिला

फिर तेरी यादों  मे डूब जाने को जी चाहता है ,
फिर उन्ही ख़्वाबों में खो जाने को जी चाहता है।
चाहता हूँ पहले की तरह रहे तू सामने रहे मेरे ,
फिर से वही ज़िंदगी जीने को जी चाहता है।।

चाहकर भी नहीं भूल पा रहा हूँ वो गुजरे हुए पल ,
अब भी सता रहे है तेरी यादों के वो हसीँ मंज़र। 
आ जाओ लौट कर मेरे जीवन में ख़्वाबों की तरह ,
फिर से तेरी गोद में सर रखने को जी चाहता है।।
 
किस तरह तुम मुझ पर अपना प्यार लुटाती थी ,
मेरी आँखों में देख दिल का हाल समझ जाती थी। 
वो एक-एक पल है याद, आज भी हरपल मुझे ,
फिर से वही गुजरे पल जीने को जी चाहता है।।

लगता है  वो पल अब लौट कर नही आएगा ,
अब तो सूना है जीवन और सूना ही रह जाएगा। 
जो बीत गया सो बीत गया अब उसे याद न कर ,
मनोज अब तो यही समझने को जी चाहता है।।
= मनोज रोहिला, अहमदपुर , सहारनपुर
 

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