हरी नाम भजो प्रभात में - कालिका प्रसाद 

pic

गाओ मिल कर गीत प्रभात के,
आशा की नई कौतुहल में,
उठ जाओ  सुप्रभात बेला में,
अब आलस  को दूर भगाओ,
विधि ने रच दी सुन्दर काया,
धरती पर स्वर्ग बसाने की,
हरी  नाम  भजो  प्रभात  में।

उपवन में गूंजे  लय तंरग,
चिडिय़ा भी गाने लगी है,
मस्ती में बहते मन्द पवन,
भौरे भी गुनगुनाने लगे है,
फूलों की खूशबू भी फैली,
कोयल भी अब कूक रही है,
हरी  नाम भजो  प्रभात में।

धरती की सोंधी माटी में,
फसलें कितनी लहरायी है,
तितलियों का झुंड आ गया,
कितनी मतवाली लगती है,
वसुधा पर झलके सुधा बिन्दु,
तरु पल्लव तब मुस्कात है,
हरी नाम भजो प्रभात में।
- कालिका प्रसाद सेमवाल,
मानस सदन अपर बाजार, रुद्रप्रयाग
 

Share this story