माँ कात्यायनी वाणी में मिठास देना - कालिका प्रसाद

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हे माँ  कात्यायनी
गोपियों की तुम अधिष्ठात्री देवी हो,
माँ हमें वाणी में मिठास देना,
जीवन में कभी जड़ता न देना,
जला कर ज्ञान का दीपक,
अंधेरा  हमारे जीवन से मिटा देना।

हे माँ कात्यायनी
तुम ही महिषासुर मर्दनी हो,
हमारे विचारों में हो सदा पवित्रता हो, 
कार्य में निष्ठा हो ऐसा वरदान देना,
सद् मार्ग पर हम सभी नित्य चले,
हमें  ऐसी शक्ति माँ तुम देना।

हे माँ कात्यायनी
यह रुप तुम्हारा मन को अति भाता है,
यदि हम कर्म से विमूढ़ हो जाये,
हमें सद् मार्ग  तुम दिखा देना,
नहीं हो मोह स्वर्ग का माँ कभी,
अपने चरणों में माँ  हमें स्थान देना।

हे माँ कात्यायनी
 माँ चार भुजाओं वाली हो तुम,
जग जननी तुम्हें कोटि कोटि प्रणाम,
फँस जाऊँ यदि जीवन में कहीं,
तुम भँवर से माँ हमें निकाल देना,
 माँ हृदय में करुणा देना।
- कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार, रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
 

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