कविता (हिंदू नववर्ष) = जसवीर सिंह हलधर

कविता (हिंदू नववर्ष) = जसवीर सिंह हलधर

चैती  माँ  का  परवाना ले, नव वर्ष हमारा आया है ।
मौसम का रूप सुहाना ले ,नव वर्ष हमारा आया है ।।

देखो माँ की परछाई में  , खुद सूरज की अगुवाई में ,
मानस पशु पक्षी खाना ले , नव वर्ष हमारा आया है ।

पतझड़ की  हुई विदाई में , देखो अमुआ  अमराई  में ,
बाली में गेहूँ दाना ले , नव वर्ष हमारा आया है ।

देखो चंदा तरुणाई में ,ध्रुव तारे की अरुणाई में , 
फसलों में छुपा खजाना ले, नव वर्ष हमारा आया है ।

उपवन की सजी बहारों में ,सरसों की खड़ी कतारों में ,
जीवन का ताना बाना ले ,नववर्ष हमारा आया है ।

गेहूँ सरसों से बतियाता , तू आगे चल मैं भी आता ,
"हलधर" का राग पुराना ले , नव वर्ष हमारा आया है ।
= जसवीर सिंह हलधर , देहरादून
 

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