कविता - जसवीर सिंह हलधर 

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ये कौन परेशान है ,
क्या देश का किसान है ।
क्या हमारी है खता ,
क्या हमें नहीं पता ?

मजहवी बयार है जी ,
देश में दरार है जी ,
नाम का किसान है ,
हाथ का निशान है ।
कौम को रहे सता  ,
क्या हमें नहीं पता ?

जिद वाली बात है जी ,
दिन नहीं है रात है जी ,
आढ़ती का ध्यान है ,
हमें कहा महान है ।
क्यों बता रहे धता ,
क्या हमें नहीं पता ?

भीड़ में शैतान है जी ,
आतंकी निशान है जी ,
क्रोध में विधान है ,
रुष्ट संविधान है ।
क्षोभ क्यों रहे जता ,
क्या हमें नहीं पता ?

कानून पे तनाव है ,
पंजाब में चुनाव है ,
व्यर्थ का बखान है , 
जानता जहान है।
पेड़ को कहें लता ,
क्या हमें नहीं पता ?
- जसवीर सिंह हलधर, देहरादून
 

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