कविता लोक साहित्यांगन समूह का प्रथम होली मिलन समारोह एवं ऑनलाइन काव्य सम्मेलन

कविता लोक साहित्यांगन समूह का प्रथम होली मिलन समारोह एवं ऑनलाइन काव्य सम्मेलन

utkarshexpress.com लखनऊ । आचार्य ओम नीरव, लखनऊ द्वारा फेसबुक  पर स्थापित प्रख्यात समूह कवितालोक का व्हाट्सएप्प संस्करण "कवितालोक साहित्यांगन" को पिछली दीपावली के दिन स्थापित किया गया था। विगत चार महीनों में इस समूह ने नयी ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। 
इसी को ध्यान में रखते हुए होली के उपरांत दिनांक - 04 अप्रैल 2021 को मध्यान्ह 2 बजे से सायं 5 बजे  जूम एप के माध्यम से "होली मिलन समारोह 2021 तथा ऑनलाइन काव्य सम्मेलन" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता - आ श्रीकांत निश्चल जी ने किया तथा मुख्य अतिथि के पद को प्रख्यात साहित्यकार डॉ श्याम मनोहर सिरोठिया जी ने सुशोभित किया। कार्यक्रम का आरंभ शंखनाद व दीप प्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात मुख्य अतिथि का स्वागत व आरंभिक उद्बोधन कर्नल प्रवीण त्रिपाठी द्वारा किया गया। 
काव्य समारोह का आरम्भ कुसुमलता 'कुसुम' के द्वारा सरस्वती वंदना -हे शारदे मां हंसवाहिनी मां, तुझको नमन है" से किया गया।
कार्यक्रम को गति प्रदान की कुशल संचालकद्वय सुश्री व्यंजना आनंद 'मिथ्या' एवं संतोष कुमारी सम्प्रीति ने जिसमें काव्यशिल्पियों ने होली के विभिन्न रसरंगों की बौछार से वातावरण को सराबोर कर दिया। जिसमें रत्नेश अवस्थी ने लीक से हट कर गीत 'अपनी होली तो हो ली',
भारती जैन दिव्यांशी ने होली पर मनोरम गजल 'मिलाकर सुर मेरे सुर में', संतोष कुमारी सम्प्रीति ने 'सजन तुम आ जाओ', शकुंतला मित्तल ने 'फागुन का महीना फिर से आया', महेश जैन ज्योति ने 'ब्रज की कुमारी वृषभानु की दुलारी', कुसुमलता "कुसुम" ने 'होली की रुत आयी', शुभदा बाजपेयी ने 'नटखट कान्हा बांह पकड़ कर करता है बरजोरी', लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाल ने 'रंग अबीर गुलाल लगाते सब रसियों की टोली', प्रेमचन्द्र अग्रवाल ने 'गाल हुए हैं लाल रंग में सबके घूंघट खोलेंगे. हर माथे पर तिलक लगा कर सबसे होली खेलेंगे', जितेंद्र मिश्र ने 'आओ कर लें हँसी ठिठोली', डॉ भावना शुक्ल की दोहावली; 'नैना ऐसे चल रहे, पिचकारी की धार', कर्नल प्रवीण त्रिपाठी ने रोला छंद में 'होली का त्योहार, बसा जन-जन के मन में', श्रीकृष्ण शुक्ल ने हास्य रस से भरे दोहे 'जिसको छोरा जान कर, जिसे लगाया रंग। निकली पत्नी की सखी, हुआ रंग में भंग', व्यंजना आनंद मिथ्या ने 'होली पर ग़ज़ल; छाया है यूँ खुमार होली का, देखो चढ़ता गुबार होली का', आशा दिनकर ने 'अबकी बार संग आया है कोरोना भी होली में', रागिनी गर्ग ने 'गोरी के मन में जगे, प्रीति भरा अनुराग',श्रीकांत निश्छल ने 'राजी होता नहीं कभी भी ये चाँदी सोना से',.
मुख्य अतिथि डॉ श्याम मनोहर सिरोठिया ने 'रंग गुलालों की बरसातें खूब हुई इस होली में', 
सोनिया सोनम 'अक्स' ने 'मैं हूँ केवल बिम्ब मात्र ही, यह संसार तुम्हारा है' तथा डॉ संध्या जैन 'श्रुति' ने 'कण-कण में होने लगा, अनबोला संचार। सतरंगी यह पर्व है होली का त्योहार' जैसी लालित्य एवं विविधता से परिपूर्ण प्रस्तुतियां देकर सुधि श्रोताओं के मन मोह लिया।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथीय उद्बोधन में इस बात को रेखांकित किया कि सभी काव्य साधकों ने अपनी  रचनाओं के माध्यम से होली को पटल पर पुनः उपस्थित किया और होली मिलन के दौरान रंगीले रसरंग में भीगने का अवसर दिया। श्रीयुत श्रीकांत निश्छल जी ने अपने सारगर्भित अध्यक्षीय उद्बोधन से पूरे कार्यक्रम का सार प्रस्तुत किया तथा आयोजकों व प्रतिभागियों की मुक्त कंठ से सराहना की। अंत में सहित्यांगन समूह के प्रभारी कर्नल प्रवीण त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया और आश्वस्त किया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे।

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