कोहराम-ए-कोरोना = शंकर जांगिड़ 

कोहराम-ए-कोरोना = शंकर जांगिड़

मचा कोहराम करोना ने फिर सबको सताया है,
बहुत तेजी से फैला जा रहा सबको रुलाया है। 

नहीं कोई असर दिखता मुझे टीका लगाने का,
ये खूँखार पहले से भी ज्यादा बन के आया है। 

करें क्या हर  तरफ़ से आ रही ख़बरें डराती हैं ,
बुरा है हाल लोगों का दिलों में डर समाया है। 

बढ़ी ही जा रही है पॉजिटिव लोगों की जनसंख्या,
कई जगहों पे फिर से लॉकडाउन को लगाया है। 

दिखाई दे रहा है सामने फिर मौत का ताँडव,
बचाने जान कितनों ने उपायों को बताया है। 

दुनियाँ भर में है कोहराम ये लेकिन कहीं ज्यादा,
मुझे लगता है भारत में असर कुछ ख़ास आया है। 

हमारे बस में है जितना करेंगे सामना उसका,
बहुत लोगों ने हिम्मत से यहाँ इसको हराया है। 

यहाँ टीका बना है जो प्रभावी है सभी कहते,
मगर फिर भी सभी डरते हैं जैसे भूत आया है। 

यही कहना है मेरा यार मरने से यूँ डरना क्या ,
उसका तो है निश्चित दिन कोई बचने न पाया है। 

हम हिम्मत से अब इस कोरोना को भी हराएँगे,
करेंगे खत्म इसको बहुत ही हमको सताया है। 
= शंकर जांगिड़ दादाजी , पो० रावतसर 
 जि० हनुमान गढ़ ( राजस्थान )
 

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