कोऊक चाही मास्टराईन = शालिनी सिंह

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कोऊक चाही मास्टराईन, कोहुंक बैक वाली न।-२
हमरे सैया जी का चाही, परधानिन कनियां।।-२
छैल-छबीले सैया मेरों पहनै धोती-कुर्ता।
तीनोंपाल सफेदी वाला फूलोंवाला कुर्ता।
फूल लगाये जेब में सैया लैके बैठे हुक्का।
देख नफासत  मोरा धड़के ,मन है हक्का- बक्का।।
उनके मूंछों पर है मरी हां हजारों कनियां।।
कोऊक--------
एक दिना सखि पिया हमारे आकर हमसे बोले।
ओ परधाईन रानी मोरी, दिल हो जो बोलो।।
सोचा रानी आज तुम्हें मै गांव की सैर कराऊं।
कहों तुम्हारो खातिर मोहन मिश्री भी ले आऊं।।
हमरे राजा पर कुर्बान हजारो रनियां।।
कोऊक---------
मै जानूं, मोरा दिलवा जाने और जाने मोरे राजाजी।
बन परधान करे है सेवा गऊवां के मोरे राजाजी।।
गबरूं और जवानन कै नेता है मोरे राजाजी।
प्यार पगें ,परसेवा से महकें उजले है मेरे राजाजी।।
हमरे राजा के आगे भरे सब पनियां।।
कोऊक-----
भइल चुनाव पिया बनिहै परधनवा।
देशवा और गऊवां कै होईहै विकसवा।।
सड़क बनी आऊर बनी सखि नहरियां।
गऊवां मां खुलिहै सखि डिग्री कलेजियां।।
आई जौ शिक्षा सखि होईहै प्रगतियां।।
कोऊक-------------
= शालिनी सिंह, गोंडा (उत्तर प्रदेश)

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