मजदूर दिवस = अनुराधा सिंह

मजदूर दिवस = अनुराधा सिंह

सिलवटें गिनाती कमीज़
सिर पर लिपटी गमछी,
माथे के पसीने कहते
मेहनत उगले मोती,
तन जिसका थक के चूर,
वो है , ........मजदूर।

आंखों में एक आस लिए
जलाए उम्मीदों के दीये,
राह अपनी वो चल चला
क्या अंधेरा,क्या सबेरा,
लाचारी ने कर दिया बेनूर,
वो है, ...…... मजदूर।

घर से लेकर कब्र तक,
पालने से लेकर पालकी तक
तन-मन से निभाए रिश्ते
उनके परिश्रम के मोल सस्ते,
न लालच, न कोई गुरूर
वो है, ......... मजदूर।

उम्र जब ढल जाती है,
चिन्ता, चिता बन जाती है
परिवार पर घूमती नजर
आंसू बहते झर-झर,
कालचक्र की नियति क्रूर,
चला गया वो सबसे दूर....….
वो है, .......... मजदूर।

आज, हम लें एक शपथ,
" देंगे उनको वहीं मोल,
जो है उनका अधिकार,
सम्मान भी देंगे,
जिनके हैं वे हकदार,
न करेंगे कम मोल देकर,
काम करने पर मजबूर,
संतुष्ट रहें हम, खुशहाल रहे मजदूर"
=  अनुराधा सिंह "अनु' राँची, झारखण्ड
 

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