चलो लौट चलें हफ्ते मे एक दिन - झरना माथुर 

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चलो लौट चलें पुराने दिन, हफ्ते  में सिर्फ एक दिन, सिर्फ एक दिन।
समय के साथ बहुत आगे बड़ गये,पीछे पलटकर देखो बहुत कुछ पीछे छोड़ आये हम, कुछ खट्टी-मीठी यादें। कुछ अपनो के साथ के वो पल,वो वादे।
चलो लौट चले पुराने दिन हफ्ते मे सिर्फ एक दिन, सिर्फ एक दिन।
क्यूं न परिवार के साथ मिलकर बैठे कुछ लम्हो के लिए, जहां पर तीन पीढ़िया हो एक साथ। एक दूसरे की खुशी के लिए । बड़ों के अनुभव ले ले। नये ज्ञान से उन्हें अबगत करा दे।
चलो लौट चलें पुराने दिन हफ्ते मे सिर्फ एक दिन सिर्फ एक दिन।
क्यूँ न गर्मियों में कभी हफ्ते मे एक दिन छत पर छिड़काव लगा लें। रात को  वही पर सबका एक साथ बिस्तर लगा लें। ठंडी हवा के साथ माँ के बनाये भोजन का आनन्द ले लें। भाई-बहन के साथ कुछ किस्से-कहानी कह ले।
चलो लौट चलें पुराने दिन हफ्ते में सिर्फ एक दिन, सिर्फ एक दिन।
क्यूँ ना सर्दी मे सर्दी की धूप सेक ले, मम्मी के आधे बने स्वेटर को अपना नाप दे दे। कुछ पुराने गाने लगा ले और साथ मे गुनगुना ले। अपने बालों को दादी - नानी से सवरवाले।
चलो लौट चलें पुराने दिन हफ्ते मे सिर्फ एक दिन ,सिर्फ एक दिन।
बारिश मे बारिश का मज़ा ले ले। गरजते बादल और बरसाती बूंदों का स्पर्श कर ले। हवा के मस्त झोंको से अपने को सहला ले। किसी को याद करके मुस्कुरा लें। कागज की नाव बनाकर आज फिर पानी मे चला ले। जी ले वो हर पल खुशी के जिसके बिना हम सब है अधूरे।
चलो लौट चलें पुराने दिन हफ्ते में सिर्फ एक दिन,सिर्फ एक दिन।
- झरना माथुर, देहरादून, उत्तराखंड

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