दीप जलाना भाई - अनिरुद्ध कुमार

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दिल से दीप जलाना भाई,
प्यार मुहब्बत हो सुखदाई।
जीवन जीवन जागे आशा,
तृप्त लगे तनमन अमराई।

परिलक्षित हो प्रीत पराई,
मीठी बोली पड़े सुनाई।
हर्षित तनमन झूमे गाये,
भोर सुनहरा पड़े दिखाई।

पुलकित यौवन करे बड़ाई,
चाल लगे जैसे तरुणाई।
आनंदित नूतनता झलके,
हर चेहरे पर हो ललाई।

झिलमिल दीप बहारें लाई।
मन मोहित हो हवाहवाई, 
खुशहाली जीवन में गाये,
मादकता मधुबन सी छाई।

सुघड़ सलोना जीवन दर्शन,
नवल दीप दमके पुरवाई।
उजियारा कणकण में झलके,
स्वागत करे सभी मुस्काई।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
 

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