सुनो = जागृति

सुनो = जागृति

सुनो !
मुझे अच्छा लगता है,
तुम्हारे अल्फ़ाज़ जो मेरी आंखों में जलते - बुझते रहते हैं
पतंगे की तरह मेरे इर्द - गिर्द 
उड़ते रहते हैं ।
सुनो !
मुझे अच्छा लगता है,
आइने को देर तक निहारना
और आइना बोलने सा लगता है
जैसे अपने अक्स से ही बातें करना चाहता है,
सुनो! 
मुझे अच्छा लगता है,
जब हल्की सी हवा,
मेरे कुंडल को छू जाती है
और हवा कहती है,
मुझे अच्छा लगता है
तेरे संग शरारत करना ।
सुनो ! 
मुझे अच्छा लगता है,
ख़ामोश आसमां को देर तक निहारना
तितलियों से बातें करना,
चिड़ियों का चह चाहना,
बारिश की बौछार में भीगना,
मुझे अच्छा लगता है।
= जागृति, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

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