प्रणय गीत -- अनुराधा पांडेय

pic

बस तुम्हारे पास आकर,
मुक्ति का आभास होता ।

और जग के ठौर सारे ,
विद्ध कर देते हृदय को ।
कोसती तुमसे विलग हो ,
वंचनादृत मैं समय को ।
एक क्षण प्रिय ! बिन तुम्हारे -
एक युग वनवास होता ।
बस तुम्हारे पास आकर ,
मुक्ति का आभास होता ।

यों लगे मझधार में जा ।
डूब जाती चेतना ही ।
बिन तुम्हारे मृत्यु वरती,
कर्म उत्सुक प्रेरणा ही ।
छोड़ कर इक देह जड़वत ,
कुछ न मेरे पास होता ।
बस तुम्हारे पास आकर ,
मुक्ति का आभास होता...

-- अनुराधा पांडेय (अनु) , द्वारिका , दिल्ली  
 

Share this story