गीत:- (आज सजनवा आवेंगे) = अनिरुद्ध कुमार

गीत:- (आज सजनवा आवेंगे) = अनिरुद्ध कुमार

फागुन जियरा में लहरे,

सांस चले गहरे गहरे,

हाल कासे बोले कह रे, आज सजनवा आवेंगे।

फागुन जियरा में लहरे, आज सजनवा आवेंगे।।

पिया पिया लागे मनरे,

जिया बासंती रंग रे,

काग अंगना में चहरे।

आज सजनवा आवेंगे।

गाड़ी धरे भोर पहरे, आज सजनवा आवेंगे।

फागुन जियरा में लहरे, आज सजनवा आवेंगे।।

लाल बिंदी माथ चटके,

कजरा अँखियों में मटके,

चाल मारे देख झटके,

आज सजनवा आवेंगे।

भौजी लागे तनि हटके, आज सजनवा आवेंगे।

फागुन जियरा में लहरे, आज सजनवा आवेंगे।।

नैन भोर ही से चमके,

कंगन बाजे थम थमके,

पाँवे पायलिया छमके,

आज सजनवा आवेंगे।

बोले ना अपने मन के, आज सजनवा आवेंगे।

फागुन जियरा में लहरे, आज सजनवा आवेंगे।।

बोली बोले सब जहरे,

जरा दूर हटके रह रे,

मन लागा बाहर भितरे,

आज सजनवा आवेंगे।

मत जाना आज नियरे, आज सजनवा आवेंगे।

फागुन जियरा में लहरे, आज सजनवा आवेंगे।।

आंचल रह रह के लहरे,

देख साड़ी गिर सोहरे,

भाई भाभी के हमरे,

आज सजनवा आवेंगे।

कैसा बौराया मन रे, आज सजनवा आवेंगे।

फागुन जियरा में लहरे, आज सजनवा आवेंगे,

अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।

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