गीत = अनिरुद्ध कुमार 

गीत = अनिरुद्ध कुमार

सुंदरता के फूल सजाये, सपनों को आधार किया।
जब जब हमने जीना चाहा, हालातों ने वार किया।।
            भोर सुनहरा आशा जोड़ा,
            ढ़लते हीं अपना मुख मोड़ा,
            सोया, जागा, हरपल दौड़ा,
            बाधाओं को पीछे छोड़ा। 
जोड़ तोड़ के उमर बिताई, मनभावन संसार किया।
जब जब हमने जीना चाहा, हालातों ने वार किया।।
            हर चाहत की गठरी बांधी,
            सीने पर झेला हर आंधी,
            आशा में सुर ताल मिलाया,
             जीवन चहका प्रेम लुभाया, 
खुशियाँ छाई मन मुस्काया, नया रूप श्रृंगार किया। 
जब जब हमने जीना चाहा, हालातों ने वार किया।।
              माया में लिपटा तन माटी,
              आँखों में चाहत बुनियादी,
              सोंच रहे दुनिया ने क्या दी,
              जीना, मरना संसार दिया।
तोड़ चला जीवन बंधन को, सोना माटी छार किया।
जब जब हमने जीना चाहा, हालातों ने वार किया।.
= अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड।

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