मनहरण घनाक्षरी = नीलू मेहरा 

मनहरण घनाक्षरी = नीलू मेहरा

हरा पीला नीला लाल, रंगों का मचा धमाल,
खुशी का आया है काल, होली तो मनाइए।

ढोल की बजे है थाप, डफली भी छोड़े छाप, 
रंग उड़े बेशुमार, भांग तो पिलाइए। 

श्याम के रंग में रंगी, मन में है प्रीत पगी,
लगन प्रेम की लगी, अब न लजाइए।

पिचकारी मारे कान्हा, रंगों से है रंग डाला,
अबीर गुलाल डाला, रंग न छुड़ाइए।।

मान करूं हास करूं, कान्हा संग रास करूं,
पूरी सब आस करूं, मन बस जाइए।

भीगा आज अंग अंग, उठी नृत्य की तरंग, 
जागी मन में उमंग, जोगिरा तो गाइए।

मादकता बढ़ रही, भांग भी तो चढ़ रही, 
पुष्पगंधा बस रही, गुजिया भी खाइये।

छंद बद्ध लय ताल, नृत्य रंग का कमाल,
राधिका  करे धमाल, दृश्य सुख पाइए।
= नीलू मेहरा, कोलकता ।
 

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