मो तो बाबुल कै कोयलियां = शालिनी सिंह 

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मो तो बाबुल कै कोयलियां, बाबुल झुलना झुलावैं।२
नितप्रति कुछ गावैं मोका हिया से लगावैं।२
बहलावै फुसलावै जग परिचय करावैं
मो तो मैया कै चांदनियां मैया अंचरा छिपावै।।
मो तो-----
मो तो अनधन सोना अपने माई- बाबा कै।
रखी देहरी पा लइकी गरू कुल से।।
हम तौ गरबिया अपने बीरन दद्दा कै।
बीरन मोछवा फरकावै हां चरित गढ़ि कै।।
मो तो---------
सखि मोरी एक बात बताऊं पते की सुन ले रानी।
बाबुल से द्वारे अपना है, मैया से घर सजनी।।
भाई भावज से घर पूरा है ,बहना से है अंगना।
बिन बाबुल नही जीना अपना ,हम बुलबुल है बाबुल के।
मो तो---------
सकल भार भरि गै बेटी, बाबुल के मन सोच।
कैसे पीले हाथ करेंगें ,कैसे सहै वियोग।।
कौन हुआं पर ध्यान धरेगा मन में है संदेह।।
मो तौ बाबुल और मैया कै दुलारी बिटियां।
मो तौ--------
मो रोऊ तो मां भी रोवै ,रोवै बाबुल भैया।
कहां गयी मोरी कोयलियां और कहां गइल मोर बछियां।।
कैसे दाना -पानी पाई , केसे दुख कही हो।
होवै हाये जस बियहवा तस बिटियां पराई।।
मो तौ------------
= शालिनी सिंह, गोंडा (उत्तर प्रदेश)

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