प्रतीक्षा के पल = अनिरुद्ध कुमार 

प्रतीक्षा के पल = अनिरुद्ध कुमार

घुँघरुओं ने गीत छेड़ा, यह प्रतीक्षा की घड़ी।
दर्द दिल का कौन जाने, बात ये कितनी बड़ी।।
बेकरारी में सदा दिल, अजनबी सी जिंदगी।
रात दिन चिंता सताये, हर घड़ी की बंदगी।।

बैठ उठ दिन रात बीते, टूट जाता आदमी,
सोंचता बेचैन होकर, कौन सी मुझमें कमी।।
आरजू में दिन गुजारे ,  बीत जाती शाम है।
गम गरल करता सदा वो, चैन ना आराम है।।

इंतजारी, बेकरारी, आह औ' तनहाइयाँ।
संग में गम का खजाना, याद की परछाइयाँ।
है कशिश, तूफान सी ये, भूलता नेकी बदी।
पल प्रतीक्षा के न आये, इस जमाने में कभी।
= अनिरुद्ध कुमार सिंह,  धनबाद, झारखंड
 

Share this story