मां शेरोवाली = ज्योत्स्ना रतूड़ी

मां शेरोवाली = ज्योत्स्ना रतूड़ी

मां शेरोवाली, 
      मां पहाड़ों वाली, 
  करती जग का कल्याण,
 मां खप्पर वाली ।

       सिद्धिदात्री मां तू,
    अधिष्ठात्री मां तू,
   हरती जग की विपदा,
 कालरात्रि मां तू।
 
           होकर शेर पर सवार, 
       करती दुष्टों का संहार,
      सुन भक्त की पुकार,
    माँ आती बार-बार ।

        दुख की घड़ी, 
     जब भी आन पड़ी,
   दौड़ी दौड़ी आई मां,
 है तू महान बड़ी।
 
       तू ही अंबा अंबिका,
    तू ही मां जगदंबिका,
 आए तेरे द्वार मां,
कर दे नष्ट दंभ का।

        शक्ति स्वरूपिणी मां, 
     ब्रह्मचारिणी मां,
   विषय विकार रहित,
 कर दे भक्त को, मां।

         आया जो तेरी शरण,
     घर में धरे उसके चरण,
   काम क्रोध तूने उसका,
 सर्वथा किया हरण।

        बोलो मां का जय कार, 
      हृदय से हर बार, 
   अबोध नादान की मां, 
सुनती करुण पुकार । 
= ज्योत्स्ना रतूड़ी ज्योति,  उत्तरकाशी, उत्तराखंड
 

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