मुक्तक - अनिरुद्ध कुमार

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मिटाके अँधेरा, उजाला बिखेरे,
मुहब्बत जवाँ हो, नया राग छेड़े।
खुशी जगमगाये, जुबां गीत गाये,
नयी रोशनी हो, घटा फिर न घेरे।

जले ना जलाये, खुशी को उकेरे,
चले राह मिलकर, सुबह शाम फेरे।
हवायें लुभाये, सुहानी फिजा हो,
सभी मुस्कुराये, चहकते सुबेरे।
-अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
 

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