मुक्तक = रीतू गुलाटी

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 (1)
आपका बुरा वक्त सच बता देता है।
लोगो की असलियत  का पता देता है।
आज कौन अपना है कौन पराया है-
सच  का आईना हमें दिखा देता है।
(2)
बुरे वक्त में हम, आजमाने लगे है।
लोग हमें अब आँखे दिखाने लगे है।
महामारी है फैली, दूर ही रहना-
दु:ख मे अपने भी  अब सताने लगे है।
(3)
बुरे वक्त की मार से कौन बच पाया।
दिल के दर्द को इन आँखो में छिपाया।
चुप ही रहे थे, नही  कुछ भी हम बोले-
भीतर के दर्द को आँखो ने बताया।
= रीतू गुलाटी ऋतंभरा, हिसार , हरियाणा 

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