नजरे ना चुराओ - मोनिका जैन

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बदले बदले से आसार नजर, आते है
भयानक चुप्पी के साथ साथ बेगानगी
मेरे दिल की धड़कन बार बार कुछ कह रही है
कुछ तो है आज यह खामोशी बोल रही है
मौसम  मे भी एक उदास चुप्पी है
मेरे कानो में कुछ अजीब सी गूंज है
मेरी ऑखे तुम पर ही टिकी है
तुम्हारे आते जाते रंगो को पंढ रही है
 बे मुरव्वत हो बेवफा हो तुम
समझ आ गया है
ऑखे मिला कर कुछ कहने का समय आ गया हो
नजरे ना चुराओ नजरे मिलाओ
कुछ न कहो
तो मेरी जिन्दगी से 
निकल जाओ
मोनिका जैन , दिल्ली 
 

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