राष्ट्रीय शब्द और राग समूह ने आयोजित किया होली काव्य सम्मलेन

राष्ट्रीय शब्द और राग समूह ने आयोजित किया होली काव्य सम्मलेन

utkarshexpress.com ,सूरत (गुजरात) राष्ट्रीय शब्द और राग समूह के संस्थापकों संजीव जैन एवं नीरज जैन द्वारा  होली काव्य सम्मलेन आयोजित किया गया। समूह की अध्यक्ष रूपल उपाध्याय के नेतृत्व में इंटरनेट के माध्यम से भारत और विदेश में रह रहे समूह के सदस्यों को एक जगह जोड़ कर गीत, ग़ज़लों और कविताओं द्वारा होली काव्य सम्मलेन संपन्न हुआ । कार्यक्रम की विशेष बात थी कि समूह के सभी साथियों ने एक साथ दूर बैठे - बैठे ही एक दूसरे को रंग लगाने और मिठाई खिलाने का उपक्रम किया और गाकर अपनी अपनी रचना समूह में साझा की । समूह के संस्थापक संजीव जैन ने अपने स्वरचित गीत से समूह को संबोधित किया , हवाओं में कैसा ये जादू चला है , रंगो का मौसम ये कैसा खिला हैं । इसके बाद समूह की अध्यक्ष रूपल उपाध्याय द्वारा अपनी आवाज़ में गीत प्रस्तुत किया गया , 
नटखट अनाड़ी मैं समझू तेरी बातें,
क्यों तू मुझे रिझाए और मुरली बजाए, 
नहीं आऊँगी तेरी बातों में कन्हैया रे ,
नहीं आऊँगी बजा ले चाहे तू कितनी मुरली रे !
होली खेल तू अपनी सखियों के संग रे !
नहीं आऊँगी बजा ले चाहे तू कितनी मुरली रे !
इसके बाद समूह के वरिष्ठ लेखक राजेश पांडेय द्वारा घनाक्षरी समूह में साझा की गयी । भागवत पांडेय जी द्वारा होली गीत के माध्यम से राजनीति पर तंज कसा गया । हास्य कवि दिलीप दुबे ने मलो अबीर कुमकुम अबीर कुमकुम गुलाल होली में रंग सबके हो बेमिसाल होली में , अपने गीत के माध्यम से सभी को रंग लगाया। संदेश जैन ने अपनी रचना। होली खेले सांवरा ले पिचकारी रंग भीगे चाहत प्रेम में जब हो राधा संग , कृष्ण राधा को समर्पित की । महेश माही जी द्वारा  मल दू प्रीत गुलाल अब नहीं धीरज मोहे शोभित अपना साथ ज्यूं कुसुम मधुकर सोहे, प्रेम में अधीरता को दर्शाया। समूह के सदस्य विभा पंसारी , सरिता गुप्ता, उषा सुरी, अनीता विजयवर्गीय, अनिल कुमार पारीक, अजय शुक्ला, मंगला श्रीवास्तव, शोभा हीर, अंजू निगम, प्रज्ञा कीर्ति वर्मा, साधना सचान, रीमा सिंह, दुर्गेश कलम, अनिल श्रीवास्तव, सुमन ओमानिया, आदित्य अजीब,मणि बेन, मधु झूनझुंवला, नेहा शर्मा,सभी के द्वारा सुंदर रचनाएं समूह में साझा की गयी । प्रवीण जी की सुंदर पंक्तियों से आयोजन का समापन हुआ , उड़ाओ हवा में अबीर गुलाल, मत रखो मन में कोई मलाल।

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