निशा सुंदरी = स्वर्णिम टण्डन 

निशा सुंदरी = स्वर्णिम टण्डन

निशा सुंदरी चल दी नभ से,

लेकर तारों की गगरी।

छाई स्वर्णिम भोर जगत में,

जाग गयी दुनियाँ सगरी।

शत दल भी फिर खिले झूम के,

प्रफुल्लित उपवन नगरी।

सुरभित हो नभ मंडल फूला,

धूम मची डगरी डगरी।

तुम भी भज लो राम नाम मन,

जिंदगानी बीती सब री।।

स्वर्णलता "सोन" दिल्ली

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