ओ बाबा खोजी न हमरों बियाह = शालिनी सिंह

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ओ बाबा खोजी न हमरों बियाह सकल वर सुंदर हो।
ओ बाबा खोजी न अवधपुर जाई राम वर सुंदर हो।।
बाबा सरयू के तीरवा नगरवां ,जहं कै शोभा वरनि नाही जाई।
वही खेलै वर चार सुंदर ,लखन भरत संग नाथ।।
ओ बाबा--------
ओ बाबा वही रे नगरिया का जैहो,जहां दसरथ जी के दुआर।
सब बिधि भांति मनोहर कौसिल्या जी कै रनिवास।।
रानी झिलमिल बैठी है मचियां तौ चेरिया करै परिचार।
उहीं खेलत होईहै कौसलनंदन हाथ लिए धनुभार।।
ओ बाबा-------
ओ बाबा राम अस खोजो वर मेरों ,करौ कुछ मन मा विचार।
ओ बाबा कैसो निंदिया तोहार कि जेही घर कन्या कुवांर।।
ओ बेटी गैइनी हम राजा के नगरिया जहां वर राम कुवांर।
हो बेटी मांगत ऊं ऐतना दहेज न मोसे रे सपार हो़।।
ओ बाबा-------
ओ बेटी मांगत अनधन सोनवा और घोड़वा असवार हो।
ओ बेटी मांगत अलकी से पलकी आऊर सेवक सात हो।।
ओ बेटी ऐतना न मोरे दहेजवा रहौ बेटी अब तूं कुंवारि हो।
ओ बेटी तूं तौ गरीब कै बेटी और राम है  राजा हमार हो।।
ओ बाबा---------
हो बाबा बगिया के भीतरा दुई अमवां हो,बीरन मोरे रखवार हो।
बाबा वोहि रें विरऊवां के नीचवा उहै बर देखौ ठाढ़ि।। 
बाबा ओकरे पिछवां ई डोलिया आऊर देखली बरियात।
बाबा ओकरे ई पिछवां मऊर धरे अपना खड़े मोरे नाथ।।
ओ बाबा--------
ओ सारे नगर कै सोनरा बेगि चलिए आवौ हो।
ओ कहरा रूचि- रूचि चौक पुरावौं,नवबत दियना जलाओ हो।।
ओ बरिया मड़वा छवाओ ,भुजवा लावा ई लावा हो।
मोरी बेटी कै संजली बरियात भांवर शुभ मंगल हो।।
ओ बाबा-------
= शालिनी सिंह, गोंडा (उत्तर प्रदेश)

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