हे  ईश्वर  = मुकेश तिवारी

हे ईश्वर = मुकेश तिवारी

हे  ईश्वर  यह  कैसी  नादानी,
यह  कैसा  तेरा  किरदार  है,
सासों में क्या रख डाला तूने,
जहाँ हँसता खेलता सँसार है। 

जनून   है  ,  बहुत  तडफ  हैं, 
खामोश चैहरे , सुनी सडक है,
फूटा है गुस्सा,नाराजी बहुत है,
ये कैसा  आज तेरा व्यवहार है।

बहुत हुई परीक्षा,अब बस कर,
कोरोना घर-घर है,हमें डसकर,
भयावह है ,परिस्थितियाँ बहुत,
ना कोई है उत्सव ना त्योहार है।

हे   ईश्वर  यह   कैसी   नादानी,
यह   कैसा    तेरा   किरदार  है,
सासों  में क्या  रख  डाला  तूने,
जहाँ  हँसता  खेलता  सँसार  है।

= मुकेश तिवारी -  वशिष्ठ, इन्दौर
 

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