हे भगवान = शंकर जांगिड़ 

हे भगवान = शंकर जांगिड़

सुन-सुन कर आँखों में पानी आता है,

रोज रोज ये दर्द सहा नहीं जाता है।

कोरोना  दे   रहा   घाव   इतने गहरे ,

किससे करें  पुकार  कहा नहीं जाता है।

अपनी   ढपली  अपना   राग सुनाते सब ,

कर के  भी  उपचार  बचा  नहीं जाता है।

रोते   रोते   आँसू   भी   अब सूख  चले,

बैठा  हूँ  चुपचाप  हिला  नहीं जाता है।

कोशिश करता हूँ मैं  लिखने की जब भी,

कंपन  करते  हाथ  लिखा  नहीं जाता है।

सब  कुछ  होगा  खत्म लोग ये कहते हैं ,

इस पर भी  विश्वास  किया नहीं जाता है।

जितने भी  हैं  देव बचालो  दुनियाँ  को ,

यूँ  बिन  आयी  मौत  मरा नहीं जाता है।

= शंकर जांगिड़ दादाजी , पो० रावतसर

जि० हनुमान गढ़ ( राजस्थान )

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