हे कृष्ण कन्हैया आओ तो = शुभम त्यागी

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हे कृष्ण कन्हैया आओ तो, मुरली तुम मधुर बजाओ तो।
गोपियाँ पुकारें हैं तुमको-2, फिर से तुम रास रचाओ तो।
हे कृष्ण कन्हैया.....
सारा जग ढूंढ रहा तुमको, हे नाथ मेरे तुम कहाँ गए।-2
सारी वसुधा है धन्य हुई, हे गिरधारी तुम जहां गए।-2
वृंदावन की गलियां सूनी, तुम सुमधुर तान सुनाओ तो।
हे कृष्ण कन्हैया......
हे सांवरिया तुम त्रिभुवन में , रहते हो और मेरे मन मे।
तुमको ढूंढा हर कण-कण में पर छबि है मन के दर्पण में।
वो द्वापर वाला युग कान्हा आकर के पुनः बसाओ तो।
हे कृष्ण कन्हैया....
गइयाँ ढूंढे, गलियां ढूंढे तुमको नटखट वंशीवाला।
हैं धन्य यशोदा मइया भी हुए पाकर धन्य हैं नन्दलाला।
हे सांवरिया आकर के भक्तों को तुम राह दिखाओ तो 
हे कृष्ण कन्हैया...
द्वापर में कान्हा बनकर के, तुमने असुरों को मारा था।-2
त्रेता में जूठे बेरों को, खाकर शबरी को तारा था।-2
कलयुग में भी हे रघुराई, भक्तो को पार लगाओ तो।
हे कृष्ण कन्हैया....
राधे-कृष्णा का प्रेम अमर, सदियों तक जग ये गायेगा।-2
गीता का ज्ञान सुनेगा जब, राधे-राधे दोहराएगा।-2
आपस में प्रेम करें हम भी,आकर कान्हा समझाओ तो।
हे कृष्ण कन्हैया....
= शुभम त्यागी, मेरठ (उत्तर प्रदेश)

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