आलमारी में रखे पुराने खत = पूनम शर्मा स्नेहिल

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कई भूली बिसरी यादों को समेटे,
*अलमारी में रखे पुराने खत*।

आज भी जीवंत कर देते हैं ,
कई एहसासों को ।

शब्दों की कशिश आज भी,
उनमें बरकरार है ।

याद है जो तुमने दिया था ,
ये पहला गुलाब मुझे ।

अपने खत में लपेट कर, 
लवों से कुछ नहीं कहा था ।

पर उस खत में लिखें ,
थे तुमने बस दो नाम ।

एक तुम्हारा और एक मेरा ,
मानों मन सारी बातें कह दी हो ।

उस कोरे कागज पर ,
लिखे दो नामों में तुमने।

आज भी जब कभी ,
उस खत को खोलती हूं मैं ।

जीवंत हो उठते हैं ,
वह हर पल , हर क्षण ।

वो नजाकत , वो शरारत ,
वो तुम्हारा दीवानापन ।

और वह तुम्हारी खामोशी में ,
उठती गिरती नजरें ।

सच कहूं तो तुम्हारी इन्हीं बातों  ने ,
दीवाना बना दिया था मुझे ।

वो पहले खत में लिपटा गुलाब,
देते वक्त तुम्हारा पहला स्पर्श ।

आज भी सहेज रखा है मैंने,
अलमारी के एक कोने में ।

वो तुम्हारा दिया पुराना खत ,
तुम्हारे दिए हुए हर एहसासों के साथ।

जब भी जी चाहता है निकाल कर उसे ,
जी लेती हूं वो सारे हसीन पल ।।
= पूनम शर्मा स्नेहिल,गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
 

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