राष्ट्रीय शब्द और राग समूह की ऑनलाइन दोहा छन्द  कार्यशाला 

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utkarshexpress.com , बड़ौदरा (गुजरात) । राष्ट्रीय शब्द और राग समूह में समूह की राष्ट्रीय अध्यक्ष रूपल उपाध्याय की अध्यक्षता में  ऑनलाइन दोहा छन्द की कार्यशाला का आयोजन हुआ। दोहा छंद लेखन के आयोजक - थे मनीष श्रीवास्तव ' बादल ',  आप भोपाल, म.प्र. में निवास करते हैं और उम्दा गजलकार हैं । समूह के सभी साथियों ने आपके सानिध्य से दोहा लेखन की बारीकियों को जाना और समझा । समूह के साथियों ने दोहा लिखने का प्रयास किया और मनीष जी द्वारा हर दोहे की बारीक समीक्षा की गई जिस कारण साथियों को दोहा लेखन संबंधित शुश्म ज्ञान की जानकारी प्राप्त हुई । 
दोहा लेखन संबंधित नियम को मनीष ने चंद पंक्तियों में समेट कर समूह के साथियों के लिए नियमावली बनाई जो भविष्य में दोहा लेखन के लिए प्रयास कर रहे साथियों के लिए कुंजी का काम करेंगे।
1. दोहा एक मात्रिक छंद है, जिसकी दो पंक्तियों में चार पद होते हैं।
2. दोहा छन्द में मात्रा नहीं गिरानी चाहिए, (अपवाद स्वरूप, सूर, कबीर, तुलसी के दोहों का उदाहरण देकर कहीं-कहीं मात्रा गिरा दी जाती है, इससे बचना चाहिए)।
3. पहली पंक्ति से दूसरी पंक्ति का संबंध साफ झलकना चाहिए।
4. इसकी पहले और तीसरे पद में 13 मात्राएं होती हैं एवं दूसरे और चौथे पद में 11 मात्राएं होती हैं।
5. अतः एक पंक्ति में कुल 24 मात्राएं होती हैं।
6. पहला और तीसरा पद 1 2 (दीर्घ) की मात्रा पर समाप्त होनी चाहिए और दूसरा और चौथा पद 2 1 (लघु) पर समाप्त होनी चाहिए।
7. मात्रा के साथ-साथ लयबद्धता का भी ध्यान रखना चाहिये , अतः पहले और तीसरे पद की समाप्ति 2 1 2 पर करें तो दोहे में अच्छी लयबद्धता आएगी।
8. दूसरे और चौथे पद के अंतिम शब्द तुकान्त होने चाहिए।
9. यदि अर्धाक्षर से कोई शब्द शुरू होता है तो अर्धाक्षर की मात्रा नहीं गिनी जाती (व्यय, ख़्वाब, द्वेष आदि)।
10. यदि अर्धाक्षर किसी शब्द के मध्य में आता है तो अर्धाक्षर की एक मात्रा गिनी जाती है ( अन्याय, अस्त, उद्गार, विस्तार आदि)।
11. यदि किसी शब्द में दीर्घ मात्रा वाले अक्षर के ठीक बाद कोई अर्ध अक्षर आता है तो मध्य में होते हुए भी अर्धाक्षर की मात्रा नहीं गिनते (ईश्वर, ताण्डव, सर्वेश्वर आदि)।
12. कुछ अक्षर संयुक्ताक्षर (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र) होते हैं। 
यदि कोई शब्द इन अक्षरों से शुरू होते हैं तो इनकी एक मात्रा ही गिनी जाती है जैसे क्षमा (1 2), त्रिदेव (1 2 1) ..
13. परंतु ध्यान रहे यदि संयुक्ताक्षर से शुरू होने वाला शब्द दीर्घ है तो दो मात्रा ही लेंगे जैसे - ज्ञानी (2 2), श्रीयुत (2 1 1) , क्षेत्र ( 2 1) , क्षोभ (2 1 )
14. ये संयुक्ताक्षर यदि शब्द के मध्य में आते हैं तो इनकी मात्रा इनके उच्चारण के अनुसार की जाती है जैसे  
रक्षक - र+क्+क्ष +क = 1111=4
अज्ञान - अ +ग् +या+न = 1121=5
पत्र - प+त्+त्र = 1 1 1 = 3
15. यदि यही अक्षर किसी दीर्घ मात्रा वाले अक्षर के बाद आते हैं तो इनको उच्चारण से नहीं केवल मात्रा से गिनते हैं। जैसे - 
राक्षक - रा+ क् +क्ष +स ...चूंकि इसमें रा दीर्घ है अतः इसके बाद आने वाला अर्ध अक्षर क् की कोई मात्रा नहीं गिनी जाएगी । अतः 
रा+ क् +क्ष +स -- 211 =4 मात्रा ही होगी
मात्रा - मा+त्+त्रा - 2+2 (चूंकि मा दीर्घ है अतः इसके ठीक बाद के अर्ध अक्षर त् की कोई मात्रा नहीं गिनी जाएगी)।
16. अनुस्वार (.) - किसी शब्द में लघु पर यदि अनुस्वार लगाते हैं तो इस अनुस्वार की एक मात्रा गिनते हैं जैसे -
हंस - ह+न्+ स - 1 1 1 = 3
पंख - प +न् + ख - 1 1 1 =3
संसार - स+न् + सा+ र  - 1 1 2 1= 5
सामंत - सा+म+न्+त = 2 1 1 1 = 5
17. वहीं, अगर किसी शब्द में दीर्घ अक्षर पर अनुस्वार है तो उसमें अनुस्वार की मात्रा नहीं गिनी जाएगी जैसे-
मांडवी = 212 =5
तांडव - 211
सारांश - 2 2 1 = 5 
18. अनुनासिक (चंद्र बिंदु) -  किसी शब्द के किसी अक्षर पर अनुनासिक होने पर, अनुनासिक की मात्रा नहीं गिनी जाती जैसे
हँसना - 1 1 2 =4
फँस 1 1 = 2
आँख - 2 1
पाँखी - 2 2 
साँस 2 1
19. किसी लघु अक्षर के बाद अर्ध र , जो ऊपर की तरफ लगता है (पर्व, गर्व आदि) में आधे र की पूरी एक मात्रा गिनते हैं..
गर्व  1 1 1 =3
पर्व  1 1 1 = 3
संदर्भ स+ न् +द+ र +भ = 1 1 1 1 1= 5 
20. किसी शब्द के किसी दीर्घ मात्रा वाले अक्षर के बाद अर्ध र, जो ऊपर की तरफ लगता है (सार्थक, दीर्घा, आदि) में आधे र की मात्रा नहीं गिनते हैं..जैसे
सार्थक - सा 2  र 0 थ 1 क 1 = 2 1 1 = 4
दीर्घा - दी 2 र 0 घा = 2 2 = 4
21. किसी शब्द के किसी लघु अक्षर के बाद अर्ध र या ऋ, जो नीचे की तरफ लगता है (प्रति, कृति, प्रकृति आदि) में आधे र या ऋ की मात्रा नहीं गिनते हैं.
प्रति - प्र 1 ति 1 = 2
प्रकृति प्र 1 कृ 1 ति 1 = 3
22. किसी शब्द के किसी दीर्घ मात्रा वाले अक्षर के बाद अर्ध र , जो नीचे की तरफ लगता है (प्राचार्य, प्रारंभ, आदि) में भी आधे र की मात्रा नहीं गिनते हैं..
प्राचार्य - प्रा 2 / चा 2 / र 0 / य 1 = 5
प्रारंभ - प्रा 2 / र 1 / म् 1/ भ 1= 5
दोहे ....रचयिता.....मनीष ' बादल '
छत भी जिनकी है नहीं, ऊनी वस्त्र न गात।
उनको हत्यारिन  लगी, ठिठुरन वाली रात।।
सेहत से रोटी बड़ी, तभी रहा वो खांस।
भर गुब्बारा  बेचता, बूढ़ा  अपनी सांस।।

दोहे ....रचयिता.....रूपल उपाध्याय
नील गगन को देख कर , लगे नाचने मोर
बरखा नहीं बरस रही, काहे इतना शोर ।
बदरी भी रोने लगी, सुनकर ये संदेश
प्रियतम मेरे जा रहे, छोड़ मुझे परदेश ।
दोहे ....रचयिता.....कविता तिवारी
चंद्रमुखी सी रूपसी, घूँघट में शरमाय,
हाय! हया से नयन पट, कैसे रही झुकाय।
झिलमिल तारों से सजी, चूनर सर पे डाल,
पिया मिलन की आस में, हुये गुलाबी गाल।
 

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