महिला काव्य मंच की मासिक गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन 

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utkarshexpress.com, दिल्ली। महिला काव्य मंच उत्तरी दिल्ली इकाई की मासिक गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन डाॅ. नीनू कुमार  (अध्यक्ष उत्तरी दिल्ली इकाई ) की अध्यक्षता  में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उत्तरी दिल्ली की उपाध्यक्ष मंजू शाक्या का संयोजन एवं संचालन रहा। गोष्ठी की शुरुआत मंजू शाक्या ने सरस्वती माँ को समर्पित करते हुये एक मुक्तक पढ़ा -
माँ राष्ट्र वंदना के स्वर को, महका कर बसो लेखनी में,
रस अलंकार छंदों के गुण, समझा कर बसो लेखनी में,
हे सप्त स्वरों की दात्री माँ, तुमसे हैं वेद पुराण सभी,
मैं शब्द साधना करती हूँ ,तुम आकर बसो लेखनी में। 
ततपश्चात सर्वप्रथम श्रीमती विभा ने अपनी रचना सुनाकर आध्यात्म से जोड़ दिया
कितनी करूण कथा है तेरी,
सिर पर सदैव लटके तलवार,
गलती चाहे जिसकी भी हो,
तुम अकेले आते तो पहनाती बाहों का हार। 
ये जन-सैलाब साथ लाये हो,
कहो मन की बात कैसे कहती,
के माध्यम से  सबको भावविभोर कर दिया।
फिर कवयित्री श्यामा भारद्वाज ने 
बहुत भटक लिए भव सागर में,
अब हरि की शरण चलें,
झूठ फरेब की छोड़ के राहें,
प्रभु की तरफ चलें।
उसके पश्चात कवयित्री अंजू अग्रवाल ने अपनी कविता में नारीमन की भावनाओं को व्यक्त किया 
बेटियां..
मां बाप की होती प्यारी,
फिर ससुराल पे क्यों हो जाती भारी
तत्पश्चात कवयित्री रेनू सिंह ने अपनी कविता सुनाकर सबको सम्मोहित कर लिया।
उसके बाद कवयित्री भूपिंदर कौर ने अपनी कविता में सुंदर भाव व्यक्त करते हुए खूब वाहवाही लूटी  -
तलाश है
गरीब को कमाई की,
बीमार को दवाई की,
बच्चों को पढ़ाई की,
ठिठुरते को रजाई की, 
तलाश है। 
भागते रहे सपनों के पीछे,        
अपनों को छोड़ दिया पीछे, 
जिसने पाला पोसा था,        
उसका दामन छोड़ दिया पीछे। 
तदोपरान्त शहादरा से पधारी कवयित्री सरिता गुप्ता ने अपनी रचना सुना कर दिल में खनकती खुशी का अहसास करा दिया।
अगर विश्वास है दिल में तो मंजिल चल के आएगी,
निराशा के हटेंगे घन सुबह भी मुस्कुराएगी,
परेशां तुम नहीं होना कि होनी हो के रहती है,
मिलेंगे रास्ते नूतन सफलता गुनगुनाएगी।
कवयित्री भावना भारद्वाज ने यादों को समर्पित अपनी रचना पढ़ी-
यादों के दायरे असीमित अनंत हैं,
इसके बाद कवयित्री पुष्पिंदर चुगती भंडारी ने अपनी कविता सुनाकर आह्लादित कर दिया- 
उसके जाने के बाद जाना,
बहुत  मुश्किल भी नहीं होता है,
तन्हा वक्त बिताना।
कार्यक्रम की संयोजक एवं संचालक कर रही कवयित्री मंजू शाक्या  ने अपने गीत सुनाकर लोगों के दिल पर दस्तक दी-
पाके उनकी छुअन रात भर चूडी कुछ बात करती रही,
देखकर उनको इक टक मुई खन खनन खन खनकती रही। .
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं  डाॅ. नीनू कुमार  ने अपनी रचना सुनाकर सबकी वाहवाही लूटी
ध्यान दो कि मैं आ रही हूँ
ढोल-नगाड़े की आवाज़ पर,
मैं बढ़ती आ रही हूँ
मुझे डर नहीं लगता कि कोई ,
मुझे देखे,
अपने होने के लिए,
मैं कोई क्षमा-याचना नहीं करना चाहती
ये मैं हूँ
दो घंटे चली इस गोष्ठी में पुनः मिलने के वादे के साथ उपस्थित सभी कवयित्री बहनों का धन्यवाद ज्ञापित  किया गया। कार्यक्रम महिला काव्य मंच की  राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय नीतू के मार्गदर्शन में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।  
रिपोर्ट - भूपिंदर कौर (उत्तरी दिल्ली इकाई)- दिल्ली से

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