हमारे नटवर नागर - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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नटवर नागर नंद दुलारे, हृदय हमारे बसते हो।
अद्भुत अनुपम लीलाओं से, भक्तों का मन हरते हो।

बाल रूप में लीला करके, लीलाधारी कहलाये।
नष्ट किया सारे असुरों को, गोकुल में जो भी आये।
अत्याचारी कंस हनन कर, हरि बन हर दु:ख हरते हो।
नटवर नागर नंद दुलारे.....१

वयःसंधि में बाल सखों सँग, सबके मन आह्लाद भरा।
बलदाऊ अरु मित्र सुदामा, में गुरुवर ने ज्ञान भरा।
कालिय रूप प्रदूषण से प्रभु, यमुना निर्मल करते हो।
नटवर नागर नंद दुलारे.....२

ब्रज मंडल में बसी गोपियाँ, तुम पर जातीं वो वारी।
चाहें छेड़ें कृष्ण कन्हैया, फिर भी लेतीं बलिहारी।
वृंदावन में रास रचाकर, राधा मोहित करते हो।
नटवर नागर नंद दुलारे.....३

योग और माया का अंतर, तुमने जग को सिखलाया।
भक्त मित्र को कैसे जीतें, दुनिया को यह दिखलाया।
राधाकृष्ण बने मनमोहन, प्राणवायु सी भरते हो।
नटवर नागर नंद दुलारे.....४

कूटनीति अरु राजनीति में, जग में तुम बेजोड़ बड़े।
तुमको सँग ले जाने खातिर, दोनों थे कर जोड़ खड़े।
सेना दुर्योधन को देकर, खुद अर्जुन सँग चलते हो।
नटवर नागर नंद दुलारे.....5

कर्तव्यों से मुख मत मोड़ें,  जीवन के यह मर्म दिया।
इच्छित फल उसको मिलता है, जिसने निश्छल कर्म किया।
विजय धर्म की हो अधर्म पर, यही सोच तुम रखते हो।
 नटवर नागर नंद दुलारे.....6

सदा सत्य पथ पर चलना है, बीच रणांगन बतलाया।
मोह अधर्मी से मत करना, अर्जुन को था सिखलाया।
गीता के उपदेशों में प्रभु, शब्द-शब्द तुम झरते हो।
नटवर नागर नंद दुलारे.....7

श्रीहरि के अवतार कन्हैया, जग आनंदित करते हो।
नटवर नागर नंद दुलारे, हृदय हमारे बसते हो।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, @tripathi_ps
 

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