पीड़ा = राजीव डोगरा

पीड़ा = राजीव डोगरा

जैसे छीन रहे हो मुझसे उन्हें, 
वैसे खुदा तुमसे,
कोई अपना छीने तो,
क्या तुम्हें दर्द नहीं होगा ?

जैसे जी रहा हूं मैं ,
तड़प-तड़प उसके बिना, 
अगर तुम्हें भी जीना पड़े, 
किसी अपने के बिना तो ?

जैसे मुस्कुरा रहा हूं,
छुपाए सीने में दर्द अपने,
अगर तुमको भी जीना पड़े, 
किसी अपने के लिए दर्द में तो?

जैसे मर रहा हूं हर पल, 
मैं उनके बिना, 
अगर तुम्हें नहीं जीना पड़े, 
हर पल किसी अपने के बिना तो ?
= राजीव डोगरा 'विमल' कांगड़ा हिमाचल प्रदेश 
 

Share this story