फागुन = प्रियदर्शनी पुष्पा

फागुन = प्रियदर्शनी पुष्पा

फागुन का महीना है
तनमन   बासंती
झांझर में नगीना है।

महकी  अँगनाई  है।
महकी  कूँज गली
बहकी   पुरवाई  है ।

राधा बावरिया है ।
दृग चितचोर तेरे
कान्हा सांवरिया है।

मौसम  ये  सुहाना है
श्यामल रंग रंगा 
गोकुल बरसाना है।

गोपियों का जमाना है।
रंगों की बारिश
होली का तराना है।

सरसों  लहराया  है।
लाल पलास खिले
प्रिय फागुन आया है ।

पुरवा संग बहकी है।
कर टेसू श्रृंगार 
अवनी मन महकी है।

कवि मंच सजी टोली।
काव्य गुलाल उड़े , 
छंदों की मची होली।
= प्रियदर्शनी पुष्पा 
 

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