फूलों सा मुस्काता चल - पूनम शर्मा 

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गीत खुशी के गाता चल,
दर्द को अपनी भुलाता चल ।
क्या रखा यादों की गलियों में ,
तू हर पल बस मुस्काता चल ।

खुशियों के वो फूल खिला, 
मायूसी में महकाता चल।
टूट बिखर जाए चाहें पर ,
अपनी खुश्बू तू फैलाता चल।

रहना अंधेरों में पूनम पर ,
चांद सी राह दिखाता चल।
अंधेरी रातों में दीया बन 
जग को रोशन कर जाता चल।

बन मेंहदी सी इस  जीवन में ,
अपनी रंगत फैलाती चल।
टूट बिखर जाए चाहे पर ,
खुश्बु-रंगत खुशियां लुटाती चल।

भुला के सारे रंजो-गम ,
फूलों सी मुस्काती चल।
बन अंधेरे का दिया सी ,
खुशियां सब पर लुटाती चल।।
- पूनम शर्मा स्नेहिल , गोरखपुर , उत्तर प्रदेश  
 

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