प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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सावन के हर सोम को, शिव का करिये ध्यान।
जिनके  दर्शन  मात्र  से, होता  जग  कल्यान।।
अक्षत  चंदन पुष्प  ले,   उनको  पूजें  आज।
महादेव   आशीष   दें,   वही   बनाएं   काज।।
सोमवार को व्रत करे, जो भी श्रावण मास।
भक्तिभाव बढ़ता रहे, संग बढ़े विश्वास।।
पार्थिव पर जलधार दे, जो करते अभिषेक।
मनोकामना पूर्ण हो, निर्मल बने विवेक।।
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सावन में शिवभक्ति की, बहती है रसधार।
अभिषेकित हो गंग से, करते बेड़ा पार।।
सोमवार का व्रत करें, श्रद्धा से जो लोग।
हर इच्छा की पूर्ति हो, ऐसे बनें सुयोग।।
माथे पर गंगा सजें, गले सर्प की माल।
कर त्रिशूल है सोहता, और चन्द्र हैं भाल।।
भक्त हृदय से कर नमन, पूजें श्रावण माह।
महादेव आशीष दें, हो पूरी हर चाह।।
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शिव-शिव नित जपते रहें, शिव से बड़ा न कोय।
कैलाशी  आशीष  दें, दुख  विनष्ट  सब होय।।
हरते हर दुख सृष्टि के, पूरी करते आस।
खुश होते उस भक्त से, जो रखता विश्वास।।
पावन सावन माह में, करिये शिव का ध्यान।
हिय में रखकर शंभु को, करिये नित गुणगान।।
कृपा दृष्टि उनकी मिले, दिल से करें प्रयास।
धन्य बने जीवन तभी, उपजे नव विश्वास।।
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श्रावण मास पुनीत है, करिये शिव अभिषेक।
महादेव को पूज कर, पायें पुण्य अनेक।।
पाप कटे सब दुख मिटें, लेते ही शिव नाम।
ऐसे भोलेनाथ को, करते नित्य प्रणाम।।
कैलाशी की हो कृपा, सब जन बनें प्रबुद्ध।
मैल सभी मन दूर कर, अंतस करिये शुद्ध।।
ऐसी भर दें प्रेरणा, त्यागें सब दुर्भाव।
बढ़े परस्पर प्रेम नित, उपजे फिर समभाव।।
- कर्नल प्रवीण प्रभाती, नोएडा  @tripathi_ps

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