प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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गीत पावस गर्जना सँग लोग मिलकर गा रहे।
पर्ण वृक्षों के चमकते हर हृदय को भा रहे।
मेघ गरजें तो उपजते सुर कई नेपथ्य में।
नव नहाये दृश्य अनुपम चित्त को अब भा रहे।
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एक दुंदुभि सी बजेगी जब क्षितिज पर मेघ आयें।
प्रीति की सिहरन उठेगी जब सँदेशा मेघ लायें।
घन गरज घनघोर करके आगमन की सूचना दें।
तप्त तनमन को जुड़ाने हर दिशा में मेघ छायें।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव @tripathi_ps
 

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